लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में कई सेवा प्रदाता फर्म द्वारा लगभग 7000 आउटसोर्सिंग कर्मचारी विभिन्न पदों पर कार्यरत हैं जो की पूरी मेहनत और ईमानदारी पूर्वक कार्य कर रहे हैं। केजीएमयू प्रशासन द्वारा 7 सेवा प्रदाता फर्म अनुबंधित करके मानव आपूर्ति का कार्य लिया जा रहा है जिसमें मैसर्स मिश्रा सिक्योरिटी द्वारा सुरक्षाकर्मियों को नगद रुपया 6600 प्रति माह दिया जा रहा है जो कि न्यूनतम वेतन से भी कम है।
कर्मचारियों को बेहद कम वेतन
इसके साथ ही शासन के आदेशानुसार प्रत्येक कर्मचारियों का वेतन कर्मचारी के खाते में आना चाहिए और कर्मचारियों के पीएफ ईएसआई का ब्यौरा भी दिया जाना अनिवार्य है। वहीं दूसरी ओर केके मैन पावर द्वारा भी कर्मचारियों को बेहद कम वेतन दिया जा रहा है । संस्थान में स्टाफ नर्स को प्रतिमाह रुपया 11000 वेतन दिया जाता है जबकि प्रदेश के अन्य संस्थानों में स्टाफ नर्स का वेतन 20,000 से अधिक है। यह जानकारी विज्ञप्ति के माध्यम से संयुक्त स्वास्थ आउटसोर्सिंग संविदा कर्मचारी संघ उप्र के प्रदेश अध्यक्ष रितेश मल्ल ने दी है।
एजेंसियोंपर कोई कार्रवाई नहीं
कई बार कर्मचारी वेतन बढ़ोतरी की मांग को लेकर केजीएमयू में प्रदर्शन भी कर चुके हैं तमाम कोशिशों के बाद भी केजीएमयू प्रशासन इन एजेंसियों के ऊपर कोई कार्रवाई नहीं करता। हाल ही में कर्मचारियों को महीने में चार छुट्टियां जो मिल रही थी उसको भी बंद कर दिया गया। अब पूरे 30 दिन ड्यूटी करवाकर वेतन दिया जाता है जो पहले 26 दिन का दिया जाता था। केजीएमयू में एजेंसी और प्रशासन मिलकर कर्मचारियों के वेतन में बड़ा खेल कर रहे हैं क्योंकि यहां न तो न्यूनतम वेतन मजदूरी अधिनियम का पालन किया जा रहा है और ना ही कोई पारदर्शिता है।
कोई एजेंसी ब्लैक लिस्टेड नहीं की गई
करोड़ों रुपए के ईपीएफ घोटाले का मामला उजागर होने तथा उच्च न्यायालय में मुकदमा के बाद भी कोई एजेंसी ब्लैक लिस्टेड नहीं की गई। केजीएमयू के विभागाध्यक्ष द्वारा झूठे आरोप लगाकर कर्मचारियों को निकाल दिया जाना, अपने अनुसार कार्य करवाना, कर्मचारियों से अधिक कार्य लेना आदि तमाम प्रकार की मनमानी यहां के विभागाध्यक्ष द्वारा की जाती है। जबकि कर्मचारियों से संबंधित कोई भी आदेश निर्गत करने का अधिकार विभाग अध्यक्ष के पास नहीं होता है।
मुख्यमंत्री तथा राज्यपाल से करेंगे शिकायत
सभी कर्मचारियों के उत्पीडऩ को रोकने तथा उचित वेतनमान व साप्ताहिक अवकाश के लिए मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य (श्रम मंत्री उप्र) तथा अपर श्रमायुक्त लखनऊ से शिकायत कर सभी एजेंसियों की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की गई है और साथ में यह भी जांच किया जाए कि केजीएमयू प्रशासन प्रत्येक माह कितना वेतन कर्मचारियों को पद अनुसार दे रहा है। अगर शिकायती पत्रों पर कार्रवाई नहीं हुई तो संयुक्त स्वास्थ आउटसोर्सिंग संविदा कर्मचारी संघ का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री तथा राज्यपाल से मिलकर कर्मचारियों के वेतन राशि के बंदरबांट की शिकायत करेगा।
























