लखनऊ। चिकित्सकों की मानें तो भारत में हर दूसरा व्यक्ति डायबिटिक रोग से पीडि़त है। जिन लोगों को डायबिटीज की शिकायत है उनमें से कुछ लोगों के पैरों के नीचे वाले हिस्से में फोड़े और छेद होने शुरू हो जाते हैं। इस बीमारी को फुट अल्सर भी कहा जाता है या गैंगरीन भी कहा जाता है। इस बीमारी के बारे में यूनानी कॉलेज में 6 दिवसीय सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) का आयोजन सर्जरी विभाग में पहली बार किया गया।
यह है तरीका
डायबीटीज के मरीजों में यह देखा गया है कि कई बार दवा करने के बाद भी गैंगरिन ठीक नहीं होता है। ऐसे में पैर काटने की भी नौबत तक आ जाती है। इस समस्या का यूनानी पद्धति से इलाज किया जा सकता है जिसमें नीम का पानी और कच्चे पपीते में शहद डालकर लेप तैयार किया जाता है, जिससे कि नीम के पानी से पैर को धोया जाता है जिससे संक्रमण खत्म किया जा सकता है। इसके बाद पपीते व शहद का बना लेप घाव के ऊपर लगा दिया जाता है। इस प्रक्रिया के अलावा लीच थैरेपी भी किया जाता है। यह प्रक्रिया लम्बे समय तक चलती है।
इस बात का दें ध्यान
उक्त तकनीक को यूनानी चिकित्सालय के डॉक्टर द्वारा ही करवाया जाना चाहिए। यह जानकारी बिजनौर औरंगाबाद स्थित राजकीय तकमिल उत्त्बि कॉलेज एवं अस्पताल में चल रहे 6 दिवसीय जराहत विषयक सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) में दिल्ली से आये जामिया हमदर्द यूनिवर्सिटी के डॉ. एसएम आरिफ जैदी ने दी।
यह है तरीका
डॉ. जैदी ने बताया कि कई ऐसे मामले सामने आ चुके हंै। ऐसे में मरीज अपने पैरों पर खड़ा नही हो पा रहा था। ऐसे कई मरीजों का इलाज किया जा चुका है। इसमें नीम के पानी से उनकी पैर की सफाई की जाती है जिसके बाद पपीता और शहद का लेप लगाया जाता है। साथ ही कई बार मरीज की लीच थैरेपी भी की जाती है। लीच थैरेपी में विशेष कैमिकल होते हैं जो गंदे खून को निकाल देते हैं जिससे खून की सप्लाई सही ढंग से होने लगती है। यूनानी कॉलेज के सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अब्दुल कवि ने बताया कि पेट के किसी भी दर्द को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बिना डॉक्टर की सलाह से पेट दर्द की कोई भी दवा नहीं लेनी चाहिए।
ये मौजूद रहे
कार्यक्रम के ऑर्गनाईजिंग चेयरमैन डॉ. अब्दुल कवि, डॉ. अरशद ताहिर, डॉ. मन्जुर अहमद, डॉ. अलजीना, डॉ. अरूण कुमार गुप्ता, कॉलेज के प्रधानाचार्य, डॉ. अब्दुल वहीद, उप्र राज्य आयुष सोसाइटी से डॉ. अब्दुल वहीद अंसारी और यूनानी विभाग के निदेशक, मो. सिकन्दर हयात सिद्दीक मौजूद रहे।
























